पत्रकार-लेखक रक्षित सोनावणे: ‘स्कम ऑफ द अर्थ’ और जातिवाद के खिलाफ लड़ाई प्रतीकात्मकता से परे

हाल ही में एक विशेष साक्षात्कार में, पत्रकार से लेखक बने रक्षित सोनावणे ने अपने बहुचर्चित उपन्यास ‘स्कम ऑफ द अर्थ’ पर विस्तार से बात की। इस बातचीत में उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रकाश डाला: जातिगत भेदभाव और जातिवाद के खिलाफ संघर्ष को केवल प्रतीकों तक सीमित न रखकर उससे आगे बढ़ने की आवश्यकता।

सोनावणे का उपन्यास ‘स्कम ऑफ द अर्थ’ समाज के उन अनदेखे पहलुओं और गहरी जड़ों वाले जातिगत पूर्वाग्रहों को उजागर करता है, जिनसे आज भी हमारा समाज जूझ रहा है। उन्होंने अपने साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि सिर्फ नारों या प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शनों से यह लड़ाई नहीं जीती जा सकती। असली बदलाव तब आएगा जब हम इस मुद्दे को इसकी जड़ से समझेंगे और सामाजिक चेतना के स्तर पर वास्तविक परिवर्तन लाने का प्रयास करेंगे।

लेखक रक्षित सोनावणे ने इस बात पर जोर दिया कि जातिवाद के खिलाफ लड़ाई को केवल सतह पर देखने के बजाय, हमें उसकी जटिलताओं और विभिन्न आयामों को स्वीकार करना होगा। यह उपन्यास और उनके विचार उन सभी के लिए एक प्रेरणा हैं जो सामाजिक न्याय और समानता के लिए प्रतिबद्ध हैं।