भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख, जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (General Manoj Mukund Naravane) अपनी नई पुस्तक ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड’ (The Curious and the Classified) के साथ पाठकों के सामने एक बिल्कुल नए अंदाज में प्रस्तुत हुए हैं। यह किताब केवल युद्ध रणनीतियों या सैन्य अभ्यासों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह जनरल नरवणे के व्यक्तिगत अनुभवों, उनकी बुद्धिमत्ता और हास्य का एक अनूठा मिश्रण है।
‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड’: युद्ध से परे मानवीय कहानियाँ
अक्सर सैन्य अधिकारियों की आत्मकथाएँ युद्ध के मैदान की गाथाओं, रणनीतिक निर्णयों और साहसिक अभियानों पर केंद्रित होती हैं। लेकिन, जनरल मनोज नरवणे ने अपनी इस किताब में इन पारंपरिक ढाँचों को दरकिनार करते हुए, एक अधिक मानवीय और व्यक्तिगत दृष्टिकोण अपनाया है। वे अपनी कहानियों में “बैटल ड्रिल” (युद्ध अभ्यास) की जगह “बेंटर” (हँसी-मजाक) को प्राथमिकता देते हैं।
इस पुस्तक में आपको जनरल नरवणे की तीक्ष्ण बुद्धि (wit) और गहरे व्यक्तिगत संस्मरणों (deeply personal memories) का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। वे अपनी यादों के गलियारों से गुज़रते हुए ऐसे किस्से सुनाते हैं जो न केवल मनोरंजक हैं, बल्कि उनकी शख्सियत के विभिन्न पहलुओं को भी उजागर करते हैं। यह किताब दर्शाती है कि एक कठोर सैन्य नेता के भीतर भी एक गहरा विचारशील और हास्य-प्रिय इंसान मौजूद है, जो जीवन के अनुभवों को एक अलग ही नज़रिए से देखता है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए एक ताज़ा हवा का झोंका है जो सैन्य नेतृत्व के मानवीय पक्ष को समझना चाहते हैं। ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड’ सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि एक ऐसे जनरल के मन की यात्रा है जो युद्ध के गंभीर पलों से लेकर जीवन के हल्के-फुल्के लम्हों तक, हर बात को अपनी अनूठी शैली में प्रस्तुत करते हैं।


