रामचंद्र गुहा का विश्लेषण: भारत में गांधी से नफरत क्यों करते हैं हिंदू दक्षिणपंथी, वामपंथी और सवर्ण?

महात्मा गांधी – एक ऐसा नाम जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और विश्व भर में अहिंसा का पर्याय है। फिर भी, उनकी विरासत उतनी ही जटिल है जितनी प्रेरणादायक। यह हैरान करने वाला हो सकता है, लेकिन भारत में आज भी कुछ वर्ग गांधी से गहरी नफरत रखते हैं। प्रसिद्ध इतिहासकार और जीवनी लेखक रामचंद्र गुहा ने इस पेचीदा सवाल पर गहन प्रकाश डाला है कि आखिर क्यों भारत के हिंदू दक्षिणपंथी, वामपंथी और सवर्ण वर्ग आज भी गांधी से नफरत करते हैं।

गांधी और हिंदू दक्षिणपंथियों की नफरत

रामचंद्र गुहा के अनुसार, हिंदू दक्षिणपंथी संगठन और उनके समर्थक गांधी से कई कारणों से घृणा करते हैं। उनका मुख्य विरोध गांधी के धर्मनिरपेक्ष विचारों से है। गांधी ने भारत को एक बहुधर्मी राष्ट्र के रूप में देखा और सभी धर्मों के सम्मान की बात की, जो हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना करने वाले समूहों के विपरीत था। विभाजन के लिए गांधी को दोषी ठहराना, और मुसलमानों के प्रति उनके कथित ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति का आरोप लगाना भी इस नफरत का एक बड़ा कारण है। उनकी अहिंसा और ‘रामराज्य’ की अवधारणा को अक्सर गलत समझा गया और ‘कमजोर’ के रूप में देखा गया।

वामपंथी विचारधारा और गांधी का विरोध

आश्चर्यजनक रूप से, गांधी का विरोध भारत के वामपंथी खेमे से भी आता है। रामचंद्र गुहा बताते हैं कि वामपंथियों की नफरत गांधी के आर्थिक और सामाजिक विचारों से उपजी है। वामपंथी उन्हें पूंजीवादी समर्थक मानते थे, क्योंकि गांधी ने बड़े उद्योगों के बजाय ग्रामोद्योग और कुटीर उद्योगों का समर्थन किया। वे गांधी के अहिंसक आंदोलन को क्रांति के लिए ‘पर्याप्त’ नहीं मानते थे और सोचते थे कि यह वर्ग संघर्ष को दबाता है। वामपंथियों ने गांधी के धार्मिक झुकाव को भी प्रगतिशील समाजवाद के मार्ग में बाधा माना, भले ही गांधी की धर्म की व्याख्या बहुत व्यापक थी।

सवर्ण वर्ग क्यों नापसंद करता है गांधी को?

तीसरा वर्ग, जिसकी गांधी के प्रति नफरत पर रामचंद्र गुहा ने प्रकाश डाला है, वह भारत का सवर्ण (ऊंची जाति) वर्ग है। गांधी ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा अस्पृश्यता के खिलाफ संघर्ष में समर्पित कर दिया था। उन्होंने ‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग किया और दलितों के उत्थान के लिए अथक प्रयास किए, जिसे सवर्णों ने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और जाति व्यवस्था पर सीधा हमला माना। गांधी ने जाति-व्यवस्था की बुराइयों को उजागर किया और उसके उन्मूलन की वकालत की, जिससे पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था में विश्वास रखने वाले सवर्णों में उनके प्रति नाराजगी पैदा हुई।

निष्कर्ष: गांधी की जटिल विरासत

रामचंद्र गुहा का यह विश्लेषण दर्शाता है कि गांधी की विरासत कितनी बहुआयामी और जटिल है। उनकी विचारधारा ने विभिन्न वर्गों को अलग-अलग कारणों से प्रभावित किया और प्रतिक्रियाएं भी विभिन्न प्रकार की मिलीं। गांधी एक ऐसे व्यक्ति थे जिनके विचार समय से आगे थे, और शायद यही कारण है कि वे आज भी प्रासंगिक हैं और बहस का विषय बने हुए हैं। उनकी आलोचना और नफरत भी उनके विशाल व्यक्तित्व और भारत के इतिहास पर उनके अमिट प्रभाव का प्रमाण है।