सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) द्वारा अपनाए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग और पोस्ट-वेरिफिकेशन सिस्टम में गंभीर तकनीकी खामियां सामने आई हैं। इन गड़बड़ियों के कारण हजारों छात्रों को अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं को प्राप्त करने और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों और शिक्षकों द्वारा इन समस्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है, जिससे बोर्ड की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग में क्या हैं मुख्य तकनीकी खामियां?
छात्रों और अभिभावकों द्वारा बताई गई प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं:
- धुंधली और अस्पष्ट स्कैन कॉपी: कई छात्रों ने अपनी जांची हुई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी सोशल मीडिया पर साझा की है, जो इतनी घटिया गुणवत्ता की हैं कि छात्रों के लिए अपनी ही हैंडराइटिंग पढ़ना मुश्किल हो गया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि शिक्षकों ने इन कॉपियों का मूल्यांकन कैसे किया होगा।
- सर्वर डाउन और वेबसाइट की अनुपलब्धता: पोस्ट-वेरिफिकेशन पोर्टल पर आवेदन के लिए निर्धारित 19 से 23 मई की अवधि के दौरान, छात्रों ने लगातार तकनीकी समस्याओं और वेबसाइट के अनुपलब्ध रहने की शिकायत की। 5 दिनों में से 3 दिन पोर्टल काम नहीं कर रहा था, जिससे आवेदन की समय-सीमा प्रभावित हुई।
- गलत फीस डिस्प्ले और भुगतान की समस्या: छात्रों ने आरोप लगाया कि आवेदन करते समय फीस का गलत डिस्प्ले हो रहा था। कहीं 3 रुपये तो कहीं 69,420 रुपये जैसी अजीबोगरीब राशि दिख रही थी। कई बार भुगतान विफल दिखाया गया, जबकि फीस कट चुकी थी।
- अनुपूरक उत्तर पुस्तिकाओं का गायब होना: कुछ अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चों की स्कैन कॉपी से अनुपूरक (सप्लीमेंट्री) उत्तर पुस्तिकाएं गायब थीं, जबकि मुख्य उत्तर पुस्तिका में उनका उल्लेख था। इससे छात्रों के पूरे उत्तरों का मूल्यांकन नहीं हो पाया।
- अंकों में विसंगतियां: एक छात्र ने दावा किया कि उसे एक वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) में सही उत्तर के लिए भी आधा अंक मिला, जो मूल्यांकन प्रक्रिया पर संदेह पैदा करता है।
आवेदन डेडलाइन का विस्तार और शिक्षा मंत्रालय का हस्तक्षेप
लगातार तकनीकी समस्याओं के कारण CBSE को स्कैन कॉपी के लिए आवेदन की डेडलाइन एक दिन बढ़ानी पड़ी। हालांकि, विस्तारित समय में भी छात्रों को समस्याओं का सामना करना पड़ा।
इन परेशानियों के बीच, शिक्षा मंत्रालय ने 17 मई को छात्रों के विरोध के बाद CBSE की पुनर्मूल्यांकन फीस में कटौती की घोषणा की थी, ताकि छात्रों पर आर्थिक बोझ कम हो सके। नई फीस संरचना इस प्रकार है:
- स्कैन कॉपी के लिए: 700 रुपये की जगह 100 रुपये।
- अंकों के सत्यापन/टोटलिंग के लिए: 500 रुपये की जगह 100 रुपये।
- प्रति प्रश्न पुनर्मूल्यांकन के लिए: 100 रुपये की जगह 25 रुपये।
CBSE का दावा और छात्रों की मांगें
इन सभी गड़बड़ियों के बावजूद, CBSE ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि “वेबसाइट बिल्कुल सही काम कर रही है।” हालांकि, छात्रों और शिक्षकों के अनुभव इस दावे के विपरीत हैं। कई छात्रों ने फीस भरने के दो दिन बाद भी स्कैन की हुई आंसर शीट न मिलने की शिकायत की है।
छात्रों ने इन गंभीर तकनीकी खामियों और मूल्यांकन में हुई कथित अनियमितताओं के बाद ग्रेस मार्क्स देने की मांग उठाई है। कई शिक्षक भी छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं, उनका मानना है कि इतनी लंबी और त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया के बजाय ग्रेस मार्क्स देकर छात्रों के परिणाम दोबारा जारी किए जाने चाहिए।
निष्कर्ष
CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग और पुनर्मूल्यांकन प्रणाली में सामने आई ये तकनीकी खामियां छात्रों के भविष्य पर सीधा असर डाल रही हैं। बोर्ड को इस पर तत्काल ध्यान देना चाहिए, सभी तकनीकी मुद्दों को हल करना चाहिए और छात्रों की शिकायतों का पारदर्शी तरीके से जवाब देना चाहिए। छात्रों के शैक्षणिक भविष्य और उनकी मानसिक शांति के लिए एक सुचारु और त्रुटिहीन प्रक्रिया सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।


