साड़ी: पहचान, विरासत और स्मृति का शाश्वत प्रतीक – सुवीर सरन की ‘द साड़ी इटर्नल’ पर समीक्षा
भारतीय संस्कृति और पहचान का एक अभिन्न अंग, साड़ी, केवल एक परिधान नहीं बल्कि कहानियों, यादों और परंपराओं का एक जीता-जागता संग्रहालय है। इसी अनमोल धरोहर का जश्न मनाती हैं लक्ष्मी मुर्देश्वर पुरी अपनी नई किताब ‘द साड़ी इटर्नल’ में। प्रसिद्ध लेखक सुवीर सरन ने इस शानदार कृति की समीक्षा की है, जो साड़ी को … Read more