आज के आधुनिक समाज में जहां हर काम का मूल्यांकन मौद्रिक रूप से किया जाता है, वहीं घरों में किए जाने वाले श्रम, खासकर महिलाओं द्वारा किए जाने वाले अथक कार्यों को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। इस महत्वपूर्ण मुद्दे को प्रभा कोटिश्वरन ने अपनी नई पुस्तक ‘Wages for Housework’ (घरेलू काम का वेतन) में एक अनूठे दृष्टिकोण से उठाया है। यह पुस्तक सिर्फ एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का आह्वान है, जो घरेलू श्रम को उचित सम्मान और पहचान दिलाने की वकालत करती है।
घरेलू श्रम की अनदेखी वास्तविकता
सदियों से, घरों के भीतर किया गया काम, जिसमें खाना बनाना, सफाई करना, बच्चों की देखभाल करना और परिवार के सदस्यों का ध्यान रखना शामिल है, को ‘प्रेम’ और ‘कर्तव्य’ की आड़ में देखा गया है, न कि ‘श्रम’ के रूप में। इसका परिणाम यह हुआ है कि लाखों गृहणियां और घरेलू श्रमिक बिना किसी आर्थिक प्रतिफल या सामाजिक सुरक्षा के अथक परिश्रम करती रहती हैं। प्रभा कोटिश्वरन की यह पुस्तक इस गहरी जड़ जमा चुकी मानसिकता को चुनौती देती है।
प्रभा कोटिश्वरन का ‘घरेलू काम का वेतन’
पुस्तक ‘Wages for Housework’ में प्रभा कोटिश्वरन (Prabha Kotiswaran) बहुत ही ठोस तर्कों के साथ यह स्थापित करती हैं कि घरेलू काम को भी अन्य आर्थिक गतिविधियों के समान ही महत्व दिया जाना चाहिए। वह इस विचार को एक नया आयाम देती हैं कि अगर इस श्रम को आर्थिक मूल्य दिया जाए, तो यह न केवल महिलाओं की स्वतंत्रता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि समाज में लैंगिक समानता की दिशा में भी एक बड़ा कदम होगा। यह एक ऐसी बहस छेड़ती है जो दशकों से चल रही है, लेकिन जिसे अक्सर पर्याप्त ध्यान नहीं मिलता।
आर्थिक पहचान और सशक्तिकरण का मार्ग
घरेलू काम को मौद्रिक मूल्य देने से कई सामाजिक और आर्थिक लाभ हो सकते हैं।
- महिलाओं का सशक्तिकरण: यह महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा, जिससे वे अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने में अधिक सक्षम होंगी।
- सामाजिक सुरक्षा: यह घरेलू श्रमिकों को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों के दायरे में ला सकता है।
- कार्य का पुनर्मूल्यांकन: यह समाज को घरेलू काम को ‘कमतर’ आंकने की बजाय उसे एक मूल्यवान योगदान के रूप में देखने के लिए प्रेरित करेगा।
- लैंगिक समानता: यह पुरुषों और महिलाओं के बीच घरेलू जिम्मेदारियों के अधिक समान वितरण को प्रोत्साहित करेगा।
प्रभा कोटिश्वरन की ‘Wages for Housework’ सिर्फ एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक चिंतन का विषय है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम समाज में अदृश्य श्रम को कैसे महत्व देते हैं और इसकी पहचान कैसे सुनिश्चित करते हैं। यह समय है कि हम घरों के भीतर किए जाने वाले हर काम को उसका उचित सम्मान दें और प्रभा कोटिश्वरन द्वारा सुझाए गए मार्ग पर विचार करें, ताकि एक अधिक न्यायपूर्ण और समान समाज का निर्माण हो सके।