साहित्यिक दुनिया में कविता का महत्व हमेशा से रहा है, लेकिन क्या यह आज भी उतना ही प्रासंगिक है जब दुनिया युद्ध, पर्यावरणीय संकटों और अनगिनत आपदाओं से जूझ रही है? हाल ही में, प्रख्यात उपन्यासकार अनुराधा रॉय ने अपनी नई कविता संग्रह “Egrets, While War” पर कवयित्री टिशानी दोशी के साथ एक गहन बातचीत की। इस बातचीत में, टिशानी दोशी ने दृढ़ता से यह तर्क दिया कि ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भी कविता की अनिवार्यता बनी हुई है।
कविता: अशांत समय का दर्पण और मरहम
आज की दुनिया अनिश्चितताओं से भरी है। एक तरफ जहाँ युद्ध की विभीषिका मनुष्यता को लगातार झकझोर रही है, वहीं दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चिंताएँ हमारे भविष्य पर सवालिया निशान लगा रही हैं। ऐसे में, जब हर तरफ निराशा और अफरातफरी का माहौल हो, तो क्या कला, विशेषकर कविता, हमें कोई राह दिखा सकती है?
अनुराधा रॉय की “Egrets, While War” और टिशानी दोशी का मत
अनुराधा रॉय का नया संग्रह “Egrets, While War” इन समकालीन मुद्दों पर एक मार्मिक टिप्पणी है। यह संग्रह युद्ध, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के जटिल ताने-बाने को बुनता है। इसी संदर्भ में, टिशानी दोशी का यह तर्क कि “कविता आज भी अपरिहार्य है” विशेष महत्व रखता है। उन्होंने जोर दिया कि कविता हमें इन कठिन वास्तविकताओं का सामना करने, उन्हें समझने और उनसे जूझने की शक्ति देती है।
कविता क्यों है अपरिहार्य?
- संवेदना का माध्यम: कविता हमें दूसरों के दर्द और संघर्षों से जुड़ने में मदद करती है, मानवीय संवेदना को जीवित रखती है।
- चिंतन और आत्मनिरीक्षण: यह हमें तेज-तर्रार दुनिया में ठहरकर सोचने, आत्मनिरीक्षण करने और गहन विचारों में डूबने का अवसर देती है।
- आशा और प्रतिरोध: सबसे अंधकारमय क्षणों में भी, कविता आशा की किरण जगा सकती है और अन्याय के खिलाफ एक मौन प्रतिरोध बन सकती है।
- व्यक्तिगत और सामूहिक मुक्ति: कविता एक व्यक्तिगत अनुभव हो सकती है, जो व्यक्ति को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में मदद करती है, और साथ ही, यह एक सामूहिक आवाज बनकर सामाजिक परिवर्तनों को भी प्रेरित कर सकती है।
कवयित्री टिशानी दोशी के शब्दों में, जब दुनिया आपदाओं के भंवर में फंसी हो, तब कविता एक ऐसे लंगर का काम करती है जो हमें बहने से रोकती है। यह हमें मानवीयता की याद दिलाती है, हमारी सामूहिक चेतना को जगाती है, और हमें भविष्य के लिए एक नई दृष्टि प्रदान करती है।
अनुराधा रॉय जैसे लेखक और टिशानी दोशी जैसे कवयित्री के माध्यम से, हम समझते हैं कि कला, विशेष रूप से कविता, केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह संकट के समय में जीवन को समझने और जीने का एक अनिवार्य तरीका है।


