भारतीय चुनावों में महिला मतदाताओं की बढ़ती शक्ति: रूही तिवारी की ‘व्हाट वुमेन वांट’

भारतीय लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है, जो महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में वृद्धि से चिह्नित है। दशकों से चला आ रहा लिंग अंतर, जहां पुरुषों की तुलना में कम महिलाएं मतदान करती थीं, अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। पत्रकार और लेखिका रूही तिवारी अपनी नई पुस्तक ‘व्हाट वुमेन वांट’ में इस ऐतिहासिक अभिसरण के जटिल पहलुओं को उजागर करती हैं।

रूही तिवारी, एक जानी-मानी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक, अपनी इस गहन शोधपरक पुस्तक के माध्यम से हमें उस यात्रा पर ले जाती हैं जिसने भारत में महिला मतदाताओं के रुख को आकार दिया है। यह पुस्तक केवल आँकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि उन विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक शक्तियों का विश्लेषण है जिन्होंने इस महत्वपूर्ण बदलाव को संभव बनाया।

लिंग अंतर कैसे सिमटा? प्रमुख कारक

तिवारी अपनी पुस्तक में उन प्रमुख कारकों की पड़ताल करती हैं जिन्होंने महिला मतदान में लिंग अंतर को कम करने में योगदान दिया है:

  • सरकारी योजनाएं और नीतियां: महिला-केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं जैसे उज्ज्वला योजना, जन धन खाते और स्वच्छ भारत अभियान ने महिलाओं को सीधे प्रभावित किया है और उन्हें अपनी आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित किया है।
  • शिक्षा और जागरूकता में वृद्धि: शिक्षा के बढ़ते स्तर और मीडिया तक पहुँच ने महिलाओं को अपने अधिकारों और राजनीतिक प्रक्रियाओं के बारे में अधिक जागरूक बनाया है।
  • राजनीतिक दलों की बदलती रणनीति: राजनीतिक दलों ने अब महिला मतदाताओं को एक अलग और महत्वपूर्ण वोट बैंक के रूप में पहचानना शुरू कर दिया है, जिससे वे महिलाओं तक पहुँचने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं।
  • सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूह (SHGs), सूक्ष्म-वित्त और कार्यस्थल पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने उन्हें आर्थिक रूप से अधिक स्वतंत्र बनाया है, जिससे उन्हें राजनीतिक निर्णयों में भाग लेने का आत्मविश्वास मिला है।
  • महिलाओं की बढ़ती आकांक्षाएं: आधुनिक भारतीय महिला अब केवल घरेलू दायरे तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है।

भारतीय लोकतंत्र पर प्रभाव

महिला मतदाताओं की बढ़ती संख्या और उनकी सक्रिय भागीदारी का भारतीय लोकतंत्र पर गहरा प्रभाव पड़ा है। यह न केवल अधिक समावेशी राजनीति की ओर ले जाता है बल्कि नीति-निर्माण को भी प्रभावित करता है, जिससे महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जाता है। ‘व्हाट वुमेन वांट’ इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे महिलाओं की आकांक्षाएं और उनकी मतदान की शक्ति अब भारत के राजनीतिक विमर्श का एक अविभाज्य हिस्सा बन गई है।

रूही तिवारी की ‘व्हाट वुमेन वांट’ उन सभी के लिए एक आवश्यक पठन है जो भारतीय राजनीति, लिंग अध्ययन और लोकतंत्र के बदलते परिदृश्य को समझना चाहते हैं। यह पुस्तक हमें याद दिलाती है कि भारत की आधी आबादी की आवाज़ अब पहले से कहीं अधिक बुलंद है और यह देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

लेखिका: रूही तिवारी

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